1. लिखते हैं हर शाम ग़ज़ल | हम पढ़ते उसके नाम ग़ज़ल |
खाबों में जब खो जाते तो, बन जाती बदनाम ग़ज़ल |
अगर मोहब्बत गुम जाती, फिर हो जाती गुमनाम ग़ज़ल |
महफ़िल में भी बिना जाम के, करती है कोहराम गज़ल।
2. हालात कभी इतने भी मुश्किल नहीं हुए। दर्द से हम टूटे पर पागल नहीं हुए।
इक आरसे लगन से पढ़ाई कर के भी, दोस्त वो नौकरी के काबिल नहीं हुए।
जिसे सिद्दत से चाहा शामो सुबह हमने, बस वही इंसान हमें हासिल नहीं हुए।
मैखाने को बदनाम कर रखा है सबने, पर पैमाने कभी किसी के कातिल नहीं हुए।
कभी काफ़िले में मेरे आगे चलने वाले, दोस्त ही मेरे जनाजे में शामिल नहीं हुए।

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