लिखना ये था कि खुश हूं तेरे बगैर भी,
लेकिन कलाम चलने से पहले आंसू चल दिये।
ये जानेमन अब तू न रहा सिकवा किससे कहे,
या अब चुप रहे या रो दे किस्सा किसे कहे।
नही पसन्द इश्क़ में मिलावट मुझे,
अगर वो मेरा है तो ख्वाब भी सिर्फ मेरा देखे
नहीं चाहती तू याद आए,
पर फिर भी न जाने क्यों तू याद आ जाता है।
किस्मत कि लकीरों में मेरे तेरा नाम नही,
न जाने क्यों ये बार बार भूल जाता है।
दिल के दर्द को मिटाने के लिए पीना चाहता हूँ,
तेरी याद न आए इसलिए यादों में किसी और को बनाना चाहता हूँ


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